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आपका म्यूचुअल फंड सही रिटर्न दे रहा या नहीं, कैसे चलेगा पता?

नई दिल्ली। पिछले कुछ साल से म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए पैसे लगाने का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। इनमें खासकर ग्रामीण लोग के वे लोग भी शामिल हैं, जो पहले म्यूचुअल फंड पर भरोसा नहीं करते थे। लेकिन, अब वे भी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे पारंपरिक निवेश माध्यमों को छोड़कर म्यूचुअल फंड में पैसे लगा रहे हैं।

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बेशक म्यूचुअल फंड काफी अच्छा रिटर्न देने हैं, खासकर अगर लंबी अवधि में। लेकिन, आपको हमेशा चेक करते रहना चाहिए कि आप सही रिटर्न दे रहा है या नहीं। आइए जानते हैं कि आप यह काम कैसे कर सकते हैं।

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कितना होना चाहिए रिटर्न
किसी भी निवेश का मतलब होना चाहिए कि वह मुद्रास्फीति से ज्यादा रिटर्न दे। इसका मतलब कि अगर महंगाई हर साल 7 फीसदी की दर से बढ़ रही है, तो रिटर्न हर हाल में इससे अधिक होना चाहिए, नहीं तो आपके मूलधन का नुकसान होगा। लेकिन, 7-8 फीसदी का रिटर्न एफडी और कई सरकारी योजनाओं में भी मिल जाता है।

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ऐसे में आपको ध्यान रखना चाहिए कि आप सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों को छोड़कर म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। आपको औसतन कम से कम 12 फीसदी रिटर्न की उम्मीद करनी चाहिए। अगर लगातार इससे कम रिटर्न मिल रहा है, तो आपको अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है।

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मकसद होना चाहिए साफ
म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय आपका वित्तीय लक्ष्य तय होना चाहिए। जैसे कि आप निवेश क्यों कर रहे हैं, कितने समय के लिए कर रहे हैं और आपको कितने रिटर्न की उम्मीद है। अगर आप एसआईपी कर रहे हैं, तो कम से कम एक से दो साल तक इंतजार करना चाहिए, तभी आपको पता चलेगा कि आपको सही रिटर्न मिल रहा है या नहीं। कई लोग तीन-चार महीने में कम रिटर्न देकर एसआईपी बंद कर देते हैं, ऐसा करने से बचना चाहिए।

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बेंचमार्क चेक करते रहें
आपको हमेशा देखते रहना चाहिए कि आपका म्यूचुअल फंड अपने बेंचमार्क से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या नहीं। अगर वह लगातार अपने बेंचमार्क से खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो आप अपने वित्तीय सलाहकार से बात करें और किसी दूसरी स्कीम में निवेश करने पर विचार करें। ऐसा न करने की सूरत में आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों से चूक सकते हैं।
जोखिम पर भी रखें नजर
म्यूचुअल फंड में अक्सर उतार-चढ़ाव लगा रहता है। अगर आपने अधिक जोखिम वाले म्यूचुअल फंड में पैसे लगाए हैं, तो हो सकता है कि शेयर मार्केट में उथल-पुथल के दौरान उसमें भी बड़ी हलचल दिखे। अगर तेजी का दौर है, तो आपका निवेश तेजी से बढ़ सकता है, वहीं गिरावट की सूरत में निवेश की वैल्यू घट भी सकती है। ऐसे में आपको अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही म्यूचुअल फंड स्कीम को चुनना चाहिए।

 

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